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34 सितारों की फौज के साथ अक्षय कुमार की फुलटू कॉमेडी, जानें कैसी है फिल्म

थिएटर्स में रिलीज हुई 'वेलकम' सीरीज की तीसरी कड़ी, बिना दिमाग लगाए ठहाके लगाने वाले दर्शकों के लिए परफेक्ट एंटरटेनमेंट पैकेज।

Reported by Kashish Solanki and edited by Shagun Chaurasia

Bollywood Films : 26 जून को प्रदर्शित हुई ‘वेलकम टू द जंगल’ की कथा एक बेहद दिलचस्प और हास्यस्पद पृष्ठभूमि से शुरू होती है, जहां टैक्स बचाने के लिए जानबूझकर एक असफल फिल्म बनाने की योजना बनाई जाती है। रोचक यह है कि इस फिल्म का निर्माण देवदास (राजपाल यादव) और परेश रावल के हाथों में सौंपा जाता है, जो शुरुआत में केवल 20 हजार के बजट के बारे में सोचते हैं, परंतु उन्हें अचानक 2000 करोड़ रुपये का विशाल बजट मिल जाता है। इस फिल्म के नायक के रूप में असफल अभिनेता अक्षय कुमार का चयन किया जाता है, जो मजबूरन भोजपुरी सिनेमा में आइटम सॉन्ग कर रहे होते हैं। कहानी में मजनू के भाई रोमियो (अरशद वारसी) और उदय के भाई येड़ा अन्ना (सुनील शेट्टी) के आने से यह कॉमेडी ड्रामा और भी पेचीदा हो जाता है।

असलियत का मजेदार घालमेल

फिल्म की स्क्रिप्ट को वास्तविकता से जुड़े रखने के लिए किरदारों को एक आर्मी की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसे दर्शक बहुत पसंद करते हैं। कहानी में मोड़ तब आता है जब कुछ हालात बनते हैं कि फिल्म की पूरी शूटिंग एक दिन में ही समाप्त करनी पड़ती है। इसके लिए एक ऐसा गांव चुना जाता है जो आतंकियों के टारगेट पर है। इसके बाद फिल्म की ऑन-कैमरा शूटिंग और असल ज़िंदगी की घटनाएं इस तरह एक-दूसरे में घुल जाती हैं कि सभी कुछ बेहद हास्यस्पद बन जाता है। दिवंगत नीरज वोरा द्वारा लिखी गई इस कहानी में दर्शकों को कोई जटिलता महसूस नहीं होती, क्योंकि यह पूरी तरह से सिचुएशनल कॉमेडी पर निर्भर करती है।

अहमद खान का जल्दबाजी वाला निर्देशन

डायरेक्टर अहमद खान ने फिल्म में 34 बड़े सितारों की एक पूरी कास्ट तैयार की है। फिल्म में पैपराज़ी का मजाक उड़ाने से लेकर अक्षय कुमार के फ्लॉप हीरो वाले टैग और ‘तीसमारखां’ जैसा माहौल बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि, निर्देशन के क्षेत्र में कुछ खामियां स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। फिल्म की एडिटिंग में एक अजीब सी हड़बड़ी नजर आती है, जिससे ऐसा लगता है कि कई सीन या तो बहुत जल्दी में शूट किए गए हैं या फिर उन्हें इतना कच्चा छोड़ दिया गया है कि सभी कुछ दर्शकों की समझ पर ही निर्भर करता है।

अक्षय का तोतलापन

एक्टिंग के मामले में अक्षय कुमार इस पूरी फिल्म का असली आकर्षण हैं। फिल्म में उनका डबल रोल और तोतली जुबान में डायलॉग बोलने से दर्शकों को खूब हंसने पर मजबूर कर देता है। इसके अलावा, राजपाल यादव और परेश रावल की पुरानी और बेहतरीन जुगलबंदी एक बार फिर स्क्रीन पर अपना जादू फैलाने में सफल रही है। वहीं, फरीदा जलाल और किरण कुमार ने भी अपने किरदारों के साथ फिल्म में अच्छा तड़का लगाया है। अन्य सह-कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं में उत्कृष्टता दिखाई है।

फुल एंटरटेनमेंट मसाला

यदि आप बॉलीवुड की शुद्ध मसाला और सिचुएशनल कॉमेडी फिल्मों के प्रशंसक हैं, जहां कहानी से अधिक सितारों की कॉमिक टाइमिंग और पंच महत्वपूर्ण होते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक बढ़िया विकल्प है। अक्षय कुमार को उनके पुराने और फुल फॉर्म वाले अंदाज में देखना बहुत मजेदार है। हालांकि, कमजोर एडिटिंग और बिखरी हुई कहानी के कारण इसमें कुछ कमियां हैं, फिर भी मनोरंजन के दृष्टिकोण से इसे सिनेमाघरों में एक बार देखना आसान हो सकता है।

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